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प्रगतिशील कविता के पांच प्रतिनधि

प्रगतिशील कविता के पांच प्रतिनधि
Author: संपादक : अरुण कमल - राजेंद्र शर्मा
ISBN: 9788170072249
Edition: मई 2011
Multiple Book Set: No

बीसवीं शताब्दी में लगातार मनुष्य की आज़ादी के स्वर तमाम दुनिया में राजनीतिक - आर्थिक - सांस्कृतिक दृष्टि से गूंजते रहे है . इतिहास में जितनी उथल पुथल उन् सौ वर्षों में हुई थी , पहले नहीं हुई थी , समाज की उत्थान और पतन दोनों के सघन तजुर्बे सामने आये . आज़ादी का चरम रूप सोवियत क्रांति और फॉसिजम का चरम रूप द्वित्य विश्व्युद्ध .

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